कहां गया 56 इंच का सीना, पीएम फंड के लिए चीन व पाकिस्तान के सामने गिड़गिड़ा रही सरकार : राणा

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कहा : प्रतिबंधित चाइनीज ऐप के माध्यम से गुहार लगा रही सरकार शर्म करे, झूठ का ढांचा हो रहा ध्वस्त

हमीरपुर, 16 दिसम्बर : 27 भारतीय दूतावासों के जरिए पीएम कोविड केयर फंड के लिए दान जुटाने के मामले में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने भाजपा व केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि अब 56 इंच का सीना कहां है, जिसके रहते धन जुटाने के लिए चीन, कतर व पाकिस्तान के सामने सरकार को गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि भाजपा व केंद्र सरकार ने झूठ की सारी हदें पार कर दी है, लेकिन झूठी की दीवारें ध्वस्त होने लगी हैं। जनता को इमोशनली ब्लैकमेल कर पाकिस्तान व चीन के खिलाफ सरकार बातें तो बड़ी-बड़ी करती है तथा चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध लगा रही है, वहीं भारतीय दूतावासों को उन्हीं प्रतिबंधित ऐप से धन जुटाने को कहा जा रहा है, जोकि शर्म की बात है और देश की जनता से धोखा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर पीएम केयर फंड चैरिटेबल ट्रस्ट है तो सरकारी एजैंसियों भारतीय दूतावासों ने पी.एम. केयर फंड के लिए प्रचार और दान क्यों प्राप्त किया। प्रतिबंधित चीनी ऐप्स पर फंड का विज्ञापन क्यों किया गया। अगर फंड आर.टी.आई. के भीतर लोक प्राधिकरण के दायरे में नहीं है तो दूतावासों ने पब्लिक डोमेन को छोड़कर क्लोज्ड चैनल से फंड के लिए विज्ञापन क्यों दिया। विदेशों से जुटाए धन का सी.ए.जी. या भारत सरकार द्वारा लेखा-जोखा क्यों नहीं किया गया है। सरकार द्वारा विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन अधिनियम (एफ.सी.आर.ए.) के पूर्वावलोकन से इस ट्रस्ट के फंड को छूट क्यों दी गई है। ऐसा विशेष उपकार क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि पाकिस्तान, कतर व चीन सहित 27 विदेशी देशों से कितना फंड प्राप्त हुआ तथा किन विदेशी कंपनियों से धन मिला। उन्होंने कहा कि झूठ की सारी सीमाएं सरकार लांघ चुकी है। विदेशों से मिले फंड की जानकारी छिपाने के लिए इसे ट्रस्ट कहकर आर.टी.आई. के दायरे से बाहर किया, लेकिन दान जुटाने को भारतीय दूतावासों की ड्यूटी लगाई।एक तरफ पाकिस्तान व चीन से भारतीय सीमा पर घुसपैठ जारी है,हमारे जवान शहीद हो रहे है और दूसरी तरफ सरकार इन देशों से पीएम केयर में मदद की गुहार भी कर रही है।मोदी सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखता है। आज इस विषय पर केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।