तानाशाह सरकार की कारगुजारी में अब पेट्रोल 100 के पार : राणा

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महंगाई और बेरोजगारी के मौके का लाभ उठाकर निरंकुश तेल कंपनियां मुनाफाखोरी की हवस में 200 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा सकती हैं कीमत
हमीरपुर 16 फरवरी
देश की चौपट अर्थव्यवस्था के बीच अब 100 पार हुए पेट्रोल को खरीदने के लिए भारी मंदी के बीच जनता बेबस है। जबकि पिछले 10 दिनों में एलपीजी गैस की कीमत दो बार बढ़ चुकी है। यह सब उसी सरकार के राज में हो रहा है जो पार्टी जरा सी कीमत बढ़ने पर विपक्ष में रहते हुए बात-बात पर सड़कों पर हंगामा करती रही है। जो तेल की कीमत 35 रुपए प्रति लीटर करने व गैस की कीमत 300 रुपए प्रति सिलेंडर करने की बात करती थी आज उसी के राज में पेट्रोल व गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि बिजनेस मंदा है, अधिकांश लोगों की सैलरी आधी है, कमाई कम है, नौकरी है नहीं। ऐसे में मुनाफाखोरी को लेकर बेलगाम हुई तेल कंपनियां चाहें तो इस मौके का लाभ उठाकर पेट्रोल की कीमत 200 रुपए भी कर सकती हैं। तानाशाह सरकार के फैसलों के आगे विपक्ष और जनता बेबस है। अव्वल विरोध तो कर नहीं पा रहे हैं और छिटपुट जो विरोध करने की हिम्मत और हिमाकत कर रहा है उसे देश की सरकार देशद्रोही करार दे रही है। लगता है कि महंगाई और रोजगार के अहम मुद्दों से भारत मुक्त हो चुका है। राणा ने कहा कि नौकरी की मांग करने वाले बेरोजगारों को कोई मीम भेजकर या धर्म की रक्षा का भ्रम फैलाकर इस मुद्दे को भी दफन किया जा रहा है। सरकार ने बेरोजगारों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर ऐसा माहौल बना दिया है कि बेरोजगारी न सरकार की जिम्मेदारी है, न जनता की जरूरत है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव के ऐतिहासिक दौर से गुजर रहे देश में महंगाई व बेरोजगारी जैसे मुद्दे गौण हो कर रह गए हैं। राणा ने कहा कि सरकारी कंपनियां धड़ाधड़ बिक रही हैं। अब जनता में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि मोदी जी जो कर रहे हैं, वह ठीक ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक गुलामी में धकेला गया देश अब निश्चित तौर पर

प्राइवेट कंपनी बनकर गुलामी की ओर अग्रसर है। अर्थव्यवस्था के गणित के हिसाब से भारत का स्थान 164वें नंबर पर जा पहुंचा है। विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री प्रोफेसर बसु के मुताबिक करीब 5 साल पहले भारत अग्रिम देशों की कतार में था और अब रसातल की ओर जाती हुई अर्थव्यवस्था के बीच 164वें नंबर पर जा पहुंचा है। मुद्दा तेल की महंगाई का नहीं है। तेल की महंगाई का असर देश के हर नागरिक के चुल्हे-चौके तक होता है। लेकिन इस मामले को मुनाफखोर कंपनियों के हवाले कर चुकी देश की सत्ता मूक और मौन हो कर आने वाले जनता के आर्थिक संकट की तमाशबीन बनी हुई है। राणा ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे जनता का दम घोंटने की कवायद में लगी हुई है। जिसमें अब घर में सोना रखने के नियमों पर भी सरकार काम कर रही है। जिसको लेकर अब बीजेपी सरकार घर में सोना रखने को लेकर नए नियम बनाने जा रही है। कुल मिलाकर देश के संसाधनों को करीब-करीब बेच चुकी सरकार की नजर अब कृषि व जनता के संसाधनों पर है। जिससे देश में गुलामी जैसा माहौल बनने के आसार बन रहे हैं जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।