दुर्घटनाग्रस्त होने पर किसानों की आर्थिक मदद करती है प्रदेश सरकार

397
जीवन सुरक्षा योजना में मृत्यु या घायल होने पर मुआवज़े का प्रावधान
ऊना: किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार दुर्घटना होने की स्थिति में उनकी पूर्ण सहायता करती है। संकट की घड़ी में किसानों की मदद के लिए प्रदेश सरकार ‘मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मज़दूर जीवन सुरक्षा योजना’ संचालित कर रही है।
जीवन सुरक्षा योजना के तहत खेती-बाड़ी करते व$क्त दुर्घटना की स्थिति में किसान की मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को तीन लाख रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। किसान के घायल होने की स्थिति में 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक मुआवज़ा दिए जाने का प्रावधान है। स्थाई रूप से रीढ़ की हड्डी टूटने पर एक लाख रुपये, दोनों बाजू या दोनों टांगें या एक बाजू तथा एक टांग के पूर्ण रूप से कटने पर 40,000, एक बाजू या टांग या चार उगलियां कटने पर 30,000, एक से तीन उगंलियों के पूर्णरूप से कट जाने पर 20,000 और आंशिक रूप से उंगली तथा अंगूठा कटने पर 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर कहते हैं कि किसानों की सहायता के लिए यह योजना वर्ष 2015-16 में आरंभ की गई थी। किन्तु पहले योजना के तहत किसान की मृत्यु पर 1.50 लाख रुपए तथा घायल होने पर अधिकतम 50 हजार रुपए के मुआवज़े का प्रावधान था। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने मई, 2019 में इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को दोगुना कर दिया। हिमाचल सरकार किसानों की मदद के लिए कृत संकल्प है। इसके लिए अधिकारियों को अधिकतम फील्ड में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि औज़ारों से हादसा होने पर मुआवज़ा
इस योजना में केवल उन किसानों तथा खेतीहर मज़दूरों की सहायता का प्रावधान है, जो कृषि मशीनरी, औज़ार तथा उपकरण आदि के प्रयोग से खेत में अथवा कृषि मशीनरी को खेत से घर, घर से खेत ले जाते हुए किसी दुर्घटना की वजह से घायल या मौत का शिकार हो जाते हैं। योजना के दायरे में वे तमाम किसान तथा खेतीहर मजदूर भी आते हैं, जो नलकूप, बोरवेल, पम्पिंग सेट आदि मशीनरी की स्थापना, संचालन, उपयोग या ढुलाई करते समय मृत्यु अथवा विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। कृषि कार्यों में उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टर, ऊर्जाचालित हल, रीपर बाइडर मशीन, पावर थ्रैशर, घास काटने की मशीन, औज़ार, उपकरण आदि भी शामिल हैं। योजना के दायरे में केवल स्थानीय किसान तथा मज़दूर ही आते हैं। इसमें कंपनी या ठेकेदार के कर्मचारियों शामिल नहीं हंै।
मुआवज़े हेतु आवेदन प्रक्रिया
ऊना जि़ला के कृषि उप-निदेशक, डॉ. अतुल डोगरा बताते हैं कि इस योजना का लाभ लेने के लिए मृतक के $कानूनी वारिस या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को दुर्घटना के दो महीने के भीतर संबंधित खण्ड कृषि अधिकारी को आवेदन करना अनिवार्य है। हादसा होने पर किसान को सम्बन्धित विकास खंड में तैनात कृषि अधिकारी तथा जि़ला कृषि उप-निदेशक कार्यालय में संपर्क करना चाहिए। विभाग किसानों की सहायता के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।