पंजाब में आप की जीत से हिमाचल में भाजपा – कांग्रेस के लिए होगी चुनौती

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शिमला. हिमाचल प्रदेश से सटे पंजाब में आम आदमी पार्टी की भारी जीत ने हिमाचल के नेताओं को चेहरे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पंजाब में हुए विधानसभा  चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सत्तारुढ़ दल कांग्रेस सहित अकाली दल और भाजपा नेताओं को पराजित किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि पंजाब के सभी पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखवीर बादल, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू जैसे दिग्गज नेताओं को आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने हरा दिया। इन दिग्गज नेताओं की हार से कांग्रेस के साथ भाजपा के नेताओं को भी चिंता में डाल दिया। पंजाब में लगभग 92 सीटों पर आगे चल रही आम आदमी पार्टी की जीत से हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी के नेता खुशी मना रहे हैं। अभी आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में पूरी तरह दस्तक नहीं दी है। प्रदेश में आप का संगठन नहीं बना है। लेकिन आम आदमी पार्टी से जुड़े नेता जश्न मना रहे हैं। पंजाब हिमाचल से सटा हुआ प्रदेश है जिससे पंजाब के राजनैतिक लहर का असर हिमाचल में भी पड़ता है। पंजाब में भारी सफलता हासिल करने के बाद तय है कि आम आदमी पार्टी अब अन्य राज्यों में भी दस्तक देगी। पंजाब में जीत के बाद केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि अब राष्ट्रीय स्तर पर इंकलाब लाने की जरुरत है। इससे तय है कि वर्ष के अंत में हिमाचल प्रदेश में होने वाले चुनावों में आम आदमी पार्टी दस्तक देगी। हिमाचल में आम आदमी पार्टी की दस्तक से तय है कि सत्तारुढ़ दल भाजपा के साथ कांग्रेस नेताओं के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। पंजाब में जीतने के बाद अब हिमाचल में भी आम आदमी पार्टी अपना सदस्यता अभियान तेजी से चलाएगी। जिससे कांग्रेस-भाजपा के उपेक्षित नेताओं के साथ सरकारी नौकरी से रिटायर हुए अधिकारी भी आम आदमी से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में सोशल मीडिया में देखा जाए को प्रदेश के कई पूर्व अधिकारी आम आदमी पार्टी की जीत का समर्थन करते हुए पोस्ट शेयर कर रहे हैं। जिससे अब लगता है कि पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश में सक्रिय होगी। अभी हिमाचल में विधानसभा चुनावों के लिए लगभग 8 महीने का समय है। अगर आम आदमी पार्टी सक्रिय होती है तो वह आठ महीने में संगठन बनाकर भाजपा कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है।