मत छेड़ो हमें, किसके इशारे पर होते हैं काम, राज खुलेंगे तो जवाब नहीं दे पाएंगे

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कांग्रेसी नेता अभी संघर्ष की मुद्रा में हैं। कैमरे के सामने कांग्रेसियों का यह संघर्ष सरकार के खिलाफ दिखता है तो परदे के पीछे अपनों से ही लड़कर कुर्सी पाने का चल रहा है। कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी के रास्ते मुख्यमंत्री की कुर्सी है। कैमरे के सामने फ्रंट फुट पर आकर सरकार के खिलाफ आक्रामक लड़ाई लड़ने वाले नेता मुकेश अग्निहोत्री भी प्रदेशाध्यक्ष के प्रबल दावेदार देखे जा रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाने वाले अग्निहोत्री के चारों तरफ कांग्रेसी नेताओं का जमघट भी दिखाई देता हैं जो मुकेश के भविष्य की सियासी गणना कर अपने भविष्य को संवारने की जुगत में दिखते हैं। कांग्रेसी नेताओं के बीच चल रहे सियासी घमासान के बीच नेशनल मॉनिटर के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शर्मा ने मुकेश अग्निहोत्री से सीधी बात की। देखिए किस राजनैतिक कौशल का परिचय देते हुए मुकेश अग्निहोत्री सवालों के जवाब देते हैं-

सवाल – प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सियासी मंच सजने लगे हैं। कांग्रेस पार्टी को जमीन में कितना मजबूत देखते हैं आप –

जवाब – हम उस पार्टी के कार्यकर्ता हैं, जिसने हिमाचल का निर्माण किया है। आज के हिमाचल की रुपरेखा कांग्रेस के नेताओं ने ही लिखी है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार हिमाचल निर्माता हैं तो प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह आधुनिक हिमाचल की निर्माता हैं। ये दो नेता न होते तो हिमाचल का मौजूदा स्वरुप सामने न होता। हिमाचल निर्माता परमार ने संघर्ष किया, तब 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। पुनर्गठन आयोग ने हिमाचल को पंजाब में मर्ज कर महापंजाब बनाने की बात कही थी। भाजपा के लोग महापंजाब बनाने की वकालत करते रहे। स्टेट हुड की मांग परमार ने की तो तात्कालीन जन संघ के लोग नारे लगाते रहे कि ‘स्टेट हुड को मारो ठुड’। लेकिन 18 वर्ष तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे परमार के संघर्ष से हिमाचल बना। इसके बाद वीरभद्र सिंह ने 60 साल राजनीति की और 6 बार और 22 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहकर प्रदेश में बिना किसी भेदभाव के विकास किया। जिससे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जड़ें बहुत मजबूत हैं। इसी मजबूत जड़ के कारण कांग्रेस 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करेगी।

सवाल : अब आगे कांग्रेस का नेता कौन होगा, इस बारे में आपकी क्या राय है –
जवाब : नेता फैक्ट्री में तैयार नहीं होते, तप, तपस्या और त्याग से नेता बनते हैं। मुझे पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष बनाया है, जिसकी भूमिका हम बेहतर ढंग से निभा रहे हैं। जनता की हर आवाज को विधानसभा में सरकार के समक्ष उठा रहे हैं। अब कांग्रेस का नेता कौन होगा, यह तो राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी तय करेंगे। उनका जो भी आदेश मिलेगा, उसके अनुसार काम करुंगा।

सवाल – प्रदेशाध्यक्ष बनने की दौड़ में आप शामिल हैं कि नहीं –
जवाब – हमें इस बात का फक्र हैं कि मुझे उस हाउस में विपक्ष के नेता के तौर पर काम करने का अवसर मिला, जिसमें वीरभद्र सिंह जैसे कदावर नेता साढ़े तीन साल बतौर सदस्य उपस्थित रहे। प्रदेशाध्यक्ष बनाना या बदलना, यह सब हाईकमान का मामला है। तय उनको करना है कि प्रदेशाध्यक्ष कौन होगा, हम तो उनके फैसले के अनुसार काम करते हैं और करते रहेंगे। नेता कर्म और भाग्य से बनते हैं। गत चुनावों में तो भाजपा ने मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को बनाने की घोषणा की थी लेकिन जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बन गए। प्रदेशाध्यक्ष कोई भी हो लेकिन यह तय है कि वर्ष 2022 में कांग्रेस की सरकार बनेगी। भाजपा सरकार को हम सत्ता से उखाड़कर फेंकने में कामयाब होंगे।

सवाल : वर्तमान अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से आप खुश हैं –
जवाब – हर व्यक्ति अपनी क्षमता और अनुभव के अनुसार काम करता है। किसी को प्रमाण पत्र देना मेरा काम नहीं हैं, मेरा काम है कि जो भूमिका दी गई है, उसको बेहतर ढंग से निभाना। मुझे हाईकमान ने विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका दी है, उसे सबसे बेहतर ढंग से निभा रहा हूं। साढ़े तीन साल में मेरी भूमिका से हाईकमान संतुष्ट है। मैंने प्रदेश की जनता की आवाज को विधानसभा में उठाया है और सरकार को घेरने का काम किया है।

सवाल : कांग्रेस में गुटबाजी बहुत दिख रही है। मुख्यमंत्री के लिए 10 दावेदार सामने आ रहे हैं। इस बारे में आपका क्या कहना है –
जवाब – ऐसा लगता है कि आप मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की भावनाओं से ओतप्रोत हैं। मुख्यमंत्री कौन होगा, यह तो भविष्य की बात है। लेकिन यह तय है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री भाजपा का नहीं होगा, कांग्रेस का ही होगा। अभी हम कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए लड़ेंगे और जीतकर कांग्रेस की सरकार बनाएंगे। मुख्यमंत्री के बारे में अंतिम फैसला जीते हुए विधायकों की राय पर हाईकमान ही करेगा।

सवाल – विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के मुद्दे क्या होंगे-
जवाब – केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मुद्दों की भरमार है। आज महंगाई ही सबसे बड़ा मुद्दा है। पेट्रोल, डीजल, गैस के साथ खाने के तेल, राशन, सीमेंट और सरिया सहित सभी की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम आदमी का जीवन मुश्किल हो गया है। महंगाई को मुद्दा बनाकर अर्धनग्न होकर सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले अब सत्ता की कुर्सी पर बैठकर चुप हैं। महंगाई अकेला ही ऐसा मुद्दा है जो भाजपा सरकार को नेस्तानबूद कर देगा। इसके साथ ही चोर दरवाजे से चिटों पर नौकरी देने का घोटाला, कोरोना काल में सरकार की नाकामी से 3600 लोगों की मौत हुई है, किसान विरोधी कानून भी बड़े मुद्दे हैं। इनके साथ ही प्रदेश में माफियाओं का राज चल रहा है। पूरे प्रदेश में सत्ता के संरक्षण में खनन माफिया, वन माफिया, शराब माफिया, तबादला माफिया, दवा माफिया काम कर रहे हैं। स्वां नदी में अवैध खनन की पोल एनजीटी के आदेश से खुल गई है। इनके साथ ही कर्मचारियों को वेतन और पेंशन न देने का मुद्दा, आउटसोर्स भर्तियों का मुद्दा, फोरलेन विस्थापितों को मुआवजा ने देना, नेशनल हाईवे का निर्माण न होना, रेल्वे का विस्तारीकरण न होने जैसे सैकड़ों मुद्दे हैं। भाजपा सरकार वायदे पूरे करने में पूरी तरह नाकाम रही है। जिससे जनता भाजपा को सबक सिखाने के लिए तैयार है, बस चुनाव का इंतजार है।

सवाल : कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ चार्जशीट कमेटी गठित की है। इसमें हमेशा की तरह रस्मअदायगी होगी या फिर कोई गंभीर आरोपों के साथ सरकार को घेरने का प्रयास होगा –
जवाब – कांग्रेस हाईकमान ने चार्जशीट कमेटी का गठन किया है। जिसमें पार्टी के सीनियर सदस्यों को स्थान मिला है। कमेटी की पहली बैठक हो चुकी है। जिसमें सरकार में हुए भ्रष्टाचार के कई मुद्दे सामने आने की सूचना है। कमेटी सभी कांग्रेस के नेताओं और जनता के फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसमें कोई रस्म अदायगी नहीं होगी बल्कि सरकार के कारनामों का चिट्ठा जनता के सामने रखा जाएगा। सरकार में हुए भ्रष्टाचार, माफिया राज और सरकार की नाकामी को उजाकर किया जाएगा। ऐसी उम्मी है कि कमेटी तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र तैयार करेगी।

सवाल : मुख्यमंत्री आरोप लगाते हैं कि आपसे साथ कांग्रेस के ही विधायक नहीं हैं। किसी भी मुद्दे पर आप कुछ कहते हैं और विधायकों की राय अलग होती है, इस बारे में आपका क्या कहना है –
जवाब – अगर मेरे साथ विधायक नहीं हैं तो सरकार को मुझे विधानसभा में विपक्षी दल के नेता के रुप में मान्यता ही नहीं देनी थी। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहता हूं कि जिस दिन वह मुख्यमंत्री बने थे, उस दिन उनके साथ कोई विधायक नहीं था और जब वह मुख्यमंत्री पद से हटेंगे तब भी कोई विधायक नहीं होगा। 80 हजार करोड़ के कर्ज से दबे होने के बाद भी सरकार कुर्सियों और ओहदों की बंदरवाट कर सरकार चला रहे हैं। लेकिन अब यह कोई काम आने वाले नहीं हैं। सरकार को अपना बोरिया बिस्तर समेट कर जाने की तैयारी कर लेनी चाहिए। अब कुर्सियां बॉटने का समय नहीं बल्कि विदाई का समय आ गया है।

सवाल – मुख्यमंत्री का यह आरोप है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, निराधार आरोप लगाकर मात्र हंगामा करते हैं। आप क्या कहते हैं –
जवाब – मुख्यमंत्री को बताना चाहता हूं कि जिस समय मुद्दों की पोटरी खुलेगी और उनके राज का पर्दाफाश होगा, तब जवाब देते नहीं बनेगा। रात के अंधेर में चीफ सेकेट्री बदलने वाले, रात के अंधेरे में प्रिसिंपल सेकेट्री बदलने वाले मुख्यमंत्री के सभी राज जनता के सामने आएंगे। आखिर क्या कारण है कि मुख्यमंत्री रात के अंधेर में ही फेरबदल करते हैं। रात के अंधेरे में ही माफियाओं को संरक्षण मिलता है जिससे प्रदेश में खनन माफिया, शराब माफिया रात के अंधेरे में प्रदेश को लूट रहे हैं। जयराम ठाकुर प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिसने संसाधन जुटाने का कोई प्रयास नहीं किया, पूरे प्रदेश में लूट मची है और हजारों करोड़ का कर्जा लेकर प्रदेश चला रहे हैं। हेलीकॉप्टर में हवा में घूमने वाले मुख्यमंत्री का जमीनी हकीकत का पता ही नहीं है। बिना बजट के प्रावधान के करोड़ों के विकास की घोषणाएं कर जनता के गुमराह कर रहे हैं। जनता जानती है कि चुनाव के समय यह झूठी विकास की घोषणाएं क्यों हो रहीं हैं। जिसका जवाब जनता चुनावों में सत्ता से बेदखल करने के लिए देगी।

सवाल . मुख्यमंत्री सीधे आपको टारगेट करके कहते हैं कि खबरों में बने रहने के लिए उचक-उचक कर हंगामा करते हैं क्योंकि वह खबरों के क्षेत्र से आए हैं, आप क्या कहेंगे –
जवाब – विधानसभा में जनता के मुद्दे उठे हैं, जिनमें बेरोजगारी, परिवहन निगम के कर्मचारियों को पेंशन का एरियर और डीए का भुगतान, करुणा मूलक आधार पर हजारों परिवारों को नौकरी देने के मामला उठा है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन बहाल करने का मुद्दा भी उठा। जिसका जवाब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नहीं दे सके। अब मीडिया में आकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय आरोप लगा रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि वह भाषा में संयम रखें। उनके राज जिस दिन खुलेंगे तो जवाब नहीं दे पाएंगे। जैसी भाषा में वह बात करेंगे, उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा तो उनको अच्छा नहीं लगेगा। वह बड़ी कुर्सी में बैठे हैं, उन्हें भाषा में संयम रखना चाहिए। उनके राज भी जल्द खुलेंगे तब भी वह जवाब नहीं दे पाएंगे और विपक्ष पर ही आरोप लगाएंगे। जनता के मुद्दों पर जवाब इसलिए नहीं देते कि सरकार की कर्मचारी और जनता विरोधी नीति सामने आ जाएगी।

आपने देखा कि किस तरह विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री सधे हुए जवाब देते हैं। वह सरकार की खिलाफत तो सीधे मुख्यमंत्री पर हमलावर होकर करते हैं लेकिन जब पार्टी की गुटबाजी, प्रदेशाध्यक्ष पद की दाबेदारी, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व और प्रदेशाध्यक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल होते हैं तो सीधा जवाब न देकर गोलमोल बात करते हैं। वह समझते हैं कि नेतृत्व को लेकर प्रदेश कांग्रेस ऐसे मोड़ पर है जहां पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के राजनैतिक भविष्य का फैसला होना है। इस कारण अभी पार्टी और पार्टी नेताओं के बारे में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है। अपनी राजनैतिक कुशलता का परिचय देते हुए मुकेश अग्निहोत्री सवालों के जवाब भी बहुत चतुराई से देते हैं। वर्तमान में तो यही देखा जा रहा है कि कांग्रेस की राजनीति में मुकेश अग्निहोत्री केंद्रबिंदु बने हुए हैं और उनके प्रदेशाध्यक्ष बनने की संभावनाएं भी दिखती हैं। अब देखना है कि कांग्रेस का चेहरा कौन होता है और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में जीतकर सत्ता में काबिज होने में कितना कामयाब होती है।