मुख्यमंत्री की मजबूरी : मन तो बहुत कुछ करने का, लेकिन न प्रदेश के पास बजट और न ही केंद्र सरकार से मांग सकते

415

 

संदीप उपाध्याय

शिमला. कोरोना संकट के कारण प्रदेश की जनता आर्थिक संकट से परेशान है। प्रदेश के लोगों का प्रमुख उद्योग पर्यटन 6 महीने से ढप है। सरकार के अनुमान के अनुसार पर्यटन उद्योग को 4 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। पर्यटन उद्योग से जुड़े हर वर्ग पर आर्थिक संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इस बारे में कहते हैं कि मन तो पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी वर्गों को राहत प्रदान करने का कर रहा है। सरकार ने लोगों को आर्थिक राहत देने के बारे में विचार भी किया लेकिन बजट इतना अधिक हो रहा है कि नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इसके लिए फायनेंस विभाग भी तैयार नहीं हैं जिसके कारण आर्थिक मदद कर पाना संभव नहीं है। पर्यटन उद्योग फिर से शुरु हो और रफ्तार पकड़े, इसके लिए सरकार ने प्रदेश् में आने वाले पर्यटकों के लिए लगाई गई सभी बंदिशें समाप्त कर दी हैं। आर्थिक संकट में फंसे लोगों को राहत देने के लिए केंद्र से बजट मांगने के सवाल पर मुख्यमंत्री कहते हैं कि केंद्र से क्या मांग करें। जिस आर्थिक संकट से प्रदेश गुजर रहा है, उसे से केंद्र भी गुजर रहा है, जिससे केंद्र से कैसे मांगा जा सकता है। वैसे केंद्र सरकार प्रदेश की आर्थिक मदद लगातार कर रहा है। मुख्यमंत्री के बयान से स्पष्ट हो गया है कि सरकार अब किसी भी वर्ग को आर्थिक मदद देने की स्थिति में नहीं है।

वर्तमान में कोरोना का दौर चल रहा है और कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। अनलॉक् 4 के बाद सब कुछ खुल जाने और प्रदेश के पर्यटकों के प्रवेश की बंदिशें हट जाने के बाद भी अभी पर्यटकों को आना मुश्किल ही लग रहा है। पूरे देश के लोगों में कोरोना का भय है जिसके कारण लोग घर पर ही रहना सुरक्षित समझ रहे हैं। सरकार भी कह रही है कि घर पर रहें और सुरक्षित रहें। ऐसे में अभी पर्यटन उद्योग को पंख लगना मुश्किल ही लग रहा है।

सरकार की आर्थिक स्थिति की बात की जाए तो सरकार पहले से ही लगभग 55 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज पर दबी है। सरकार को कर्ज पर ब्याज ही 15 हजार करोड़ के करीब देना होता है। कोरोना संकट के कारण सरकार के राजस्व वसूली में भी 50 फीसदी से अधिक कमी आई हैं वहीं केंद्र सरकार ने भी जीएसटी से प्रदेश का हिस्सा प्रदेशों के देने से इंकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने खर्च पूरे करने के लिए कर्ज ले लें। जिसके कारण प्रदेश में आर्थिक संकट और गहराने वाला है। मुख्यमंत्री चाहते हुए भी जनता की मदद इसलिए नहीं कर सकते कि सरकार का खचाना खाली है और कर्ज से दबा हुआ है। अब यह आम आदमी के लिए चुनौती ही है कि किस तरह आर्थिक संकट से अपने आप को उबारे।