सहानुभूति के सहारे अर्की में मजबूत प्रत्याशी दिख रहे गोविंद शर्मा

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शिमला. अर्की विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनावों के लिए उम्मीदवार चयन करना भाजपा को बहुत मुश्किल हो रहा है। इसका कारण है कि अर्की के पूर्व विधायक गोविंद शर्मा ने अपने जनाधार के कारण पार्टी नेताओं को मुश्किल में डाल दिया है। उपचुनावों की तैयारियों के चलते गोविंद शर्मा ने संगठन के नेताओं के सामने टिकट की दावेदारी कर क्षेत्र में प्रचार अभियान शुरु किया। गोविंद शर्मा के समर्थन में आते क्षेत्र के लोगों ने यह बता दिया है कि गोविंद शर्मा किसी भी दृष्टि से कमजोर नहीं है। गोविंद शर्मा को कर्मचारी नेता सुरेंद्र ठाकुर का पूरा समर्थन मिल रहा है तो क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य, पंचायत समित सदस्य भी गोविंद शर्मा के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उपचुनाव को लेकर गोविंद शर्मा की सक्रियता से यह कहा जा सकता है कि वह चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार हैं। भाजपा से टिकट मिल गया तो ठीक, नहीं तो वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। शर्मा पहले तो पार्टी टिकट लेने के बाद करते हैं, टिकट न मिलने की स्थिति पर समर्थकों की मांग पर निर्णय लेने की बात करते हैं। वह आजाद लड़ेंगे, इस बारे में अभी खुलकर नहीं बोल रहे क्योंकि यह उनकी सियासी रणनीति का हिस्सा है कि जब तक पार्टी टिकट फाइनल नहीं होता, तब तक पार्टी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठना और न ही बोलना, नहीं तो विरोधी नेता उसका फायदा उठाएंगे। लेकिन गोविंद शर्मा ने टिकट के लिए प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, संगठन महामंत्री पवन राणा, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मिलकर गोविंद शर्मा ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।

गोविंद शर्मा अर्की से पूर्व में विधायक थे। गोविंद शर्मा कहते हैं कि गत चुनाव में उनके स्वास्थ्य ठीक न होने की बात संगठन में पहुंचाकर विरोधियों ने टिकट कटवा दिया था। टिकट कटने के बाद भी मैंने पार्टी के लिए काम किया लेकिन पार्टी का उम्मीदवार कमजोर होने और कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदेश के 6 बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के होने के कारण पार्टी की हार हुई। चुनाव परिणाम के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो गोविंद शर्मा को उम्मीद थी कि उन्हें सत्ता में स्थान दिया जाएगा। लेकिन सरकार बने अब चार साल पूरे होने को है, गोविंद शर्मा को कहीं स्थान नहीं मिला। जिससे गोविंद शर्मा सरकार और संगठन से नाराज भी दिखाई देते रहे हैं। अब अचानक पूर्व मुख्यमंत्री और अर्की के विधायक वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अर्की में उपचुनाव होने हैं। जिससे गोविंद शर्मा को फिर से जनता के भरोसे विधायक बनने की उम्मीद बढ़ी है। उपचुनाव के लिए गोविंद शर्मा प्रचार के लिए जनता के बीच गए तो उन्हें भारी समर्थन मिला, जिससे गोविंद शर्मा की उम्मीदों को और ताकत मिली है। इसके साथ ही कर्मचारी नेता सुरेंद्र ठाकुर को भी सत्ता में स्थान नहीं मिला। सरकार बनने के बाद सुरेंद्र ठाकुर की सत्ता में ताजपोशी तय हो गई थी लेकिन अंदरुनी कलह के कारण वह पदभार ग्रहण नहीं कर पाए। सत्ता में स्थान न मिलने के कारण सुरेंद्र ठाकुर भी अंदरखाते सरकार से खफा दिखते हैं। गोविंद शर्मा और सुरेंद्र ठाकुर को सत्ता में स्थान न मिलने का कारण अर्की के विरोधी गुट के नेता और पूर्व में रहे प्रत्याशी को ही माना जाता है। जिसके कारण गोविंद शर्मा खुलकर पूर्व में अर्की से भाजपा प्रत्याशी रहे रतन पाल सिंह का विरोध कर रहे हैं। गत विधानसभा चुनाव में टिकट कटने और चार साल तक सत्ता में कोई ताजपोशी न होने के कारण गोविंद शर्मा के साथ क्षेत्र के लोगों की सहानुभूति मिल रही है। अब देखना है कि भाजपा किसे मजबूत प्रत्याशी मानकर टिकट देती है और गोविंद शर्मा किस भूमिका में जनता के सामने आते हैं। यह सब चुनाव की घोषणा होने के बाद भाजपा के टिकट का ऐलान करने से साफ होगा।