स्वास्थ्य विभाग की भ्रष्टाचारी सेहत को सुधारना मंत्री और सचिव के लिए चुनौती, अब महंगी ऑक्सीजन घोटाले के आरोपों से घिरा विभाग

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शिमला. जनता की सेहत सुधारने की जिम्मेदारी वाले स्वास्थ्य विभाग की सेहत को भ्रष्टाचार का रोग लगा है। प्रदेश में जयराम सरकार बनने के समय से ही स्वास्थ्य विभाग लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा है। कांगड़ा के पत्र बम से उठे सवालों से लेकर सिरेंज बेंचने वाले मंडी के सरदार का मुद्दा भी स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। कोराना कॉल में खरीदी गईं पीपीई किट में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया तो सीएमओ के माध्यम से बिना टेंडर खरीदी गईं लगभग 125 करोड़ की दवाओं का मुद्दा भी सवालों में रहा। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे होने के कारण ही जयराम सरकार के अभी तीन साल भी नहीं हुए और स्वास्थ्य विभाग के मंत्री बदले, सचिव बदले और डायरेक्टर जेल गए। लंबे समय तक स्वास्थ्य विभाग मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अधीन रहने के बाद सरकार ने मंत्री राजीव सहजल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी तो उसके बाद स्वास्थ्य सचिव आर डी धीमान को हटाकर अमिताभ अवस्थी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री और सचिव के पदभार संभालने के चंद दिनों बाद ही स्वास्थ्य विभाग में ऑक्सीजन खरीददारी का मामला आ गया। जिसे लेकर विवाद यह है कि सरकार के अधिकारियों ने नियमों को बदलकर महंगे दामों पर ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ऑक्सीजन खरीदने का मामला अदालत में भी पहुंचा हैं जिससे विभाग के अधिकारियों को जवाब देने में भी परेशानी हो रही है। ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के मालिकों ने मंडी में प्रेस कॉफ्रेंस कर आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारियों ने नियमों में बदलाव कर महंगे दामों में सिलेंडर खरीदे हैं।

सूचना के अधिकार (RTI) में खुलासा हुआ है कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के कुछ आला अधिकारियों ने जमकर मनमानी की। तथ्यों के साथ एक विस्तृत शिकायत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी गई है। इसके अनुसार खाली गैस के सिलेंडर जहां पर लगभग दोगुने दामों पर खरीद कर सरकार को 3 करोड़ के लगभग चूना लगा दिया है। वहीं, 500 रूपए में मिलने वाला ऑक्सीमीटर 2950 रूपए में खरीदा गया। रोचक तो यह है कि महकमे ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के माध्यम से की जिसका स्वास्थ्य सेवाओं और इसके सामान के साथ कोई लेदा देना ही नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन गैस और सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर उत्पादकों ने सरकार के कुछ आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसे लेकर उत्पादकों ने जहां सरकार को कोरोना काल में ही करोड़ों रूपए का चूना कोरोना काल में लगाने के गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, दूसरी तरफ अनुभवी और गुणात्मक उत्पाद के लिए मशहूर दो दशक पुरानी फर्मों को इस सप्लाई से बाहर करने का घिनौना खेल खेलने का भी आरोप है। ऑक्सीजन गैस की दुनिया में दो दशक पुराना नाम एन आईएसओ 9001:2008 मंडी की मांडव एयर इंडस्ट्री और आरडी गैस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भेजे गए इस पत्र कही प्रतियां प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, सचिव स्वास्थ्य और निदेशक को भेजी गई हैं।

इसकी प्रतियां उन्होंने पत्रकारों को जारी करते हुए बताया कि कोविड 19 के चलते भी अधिकारियों ने सरकार को चूना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन फर्मों के संचालकों आरपी कपूर और सुधांशू कपूर द्वारा भेजे गए इन पत्रों में कहा गया कि कोरोना काल में प्रदेश के अस्पतालों को गैस सिलैंडर और गैस सप्लाई करने में दिन रात लगे हुए हैं। मानवीय दृष्टिकोण से भी मदद कर रहे हैं, टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी में पहले से ही उनकी सप्लाई तय दरों पर चल रही है। सरकार को डी साइज का सिलैंडर 13500 और बी साइज का 9100 रूपए में पुरानी दर पर ही देने की पेशकश भी लिखित तौर पर की थी और इस दर पर वह कर भी रहे हैं। मगर इसके बावजूद भी प्रदेश के 6 अस्पतालों में पाइप लाइन बिछाने और सिलेंडर सप्लाई का ठेका केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के माध्यम से दिल्ली की एक फर्म को 5 करोड़ 65 लाख दिया गया जिसमें 13500 वाला सिलैंडर 18500 और 9100 वाला 15750 में सप्लाई किया गया। यह सब ऑन रिकार्ड दर्ज है।