सत्ता का सुख : हेरीटेज बिल्डिंग ओकओवर में 10 सीढ़ियां चढ़ने के लिए 35 लाख की लिफ्ट

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शिमला. सत्ता पक्ष मौन लेकिन जनता बोल रही और बेझिझक बोल रही है। सोशल मीडिया में हिमाचल की जनता के बीच सबसे हाट टापिक मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सरकारी निवास ओक ओवर में 10 सीढ़ियां चढ़ने के लिए 35 लाख की लिफ्ट लगाने का मामला बना हुआ है। सरकारी बंगले में 35 लाख की लिफ्ट लग रही है या एस्केलेटर लग रहा है या नहीं लेकिन इसकी चर्चा डिजिटल मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर जरुर हाट टापिक बना हुआ है। ओकओवर की पहली ही मंजिल चढ़ने के लिए युवा और जवान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए एस्केलेटर लगाने की बात को लोग फिजूल खर्ची बता रहे हैं। लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बुजुर्ग मुख्यमंत्री भी रहे हैं तब भी पहली मंजिल की 10 सीढ़ियां चढ़ने के लिए 35 लाख की लिफ्ट नहीं लगाई गई तो युवा मुख्यमंत्री को 10 सीढ़ियां चढ़ने में क्यों परेशानी हो रही है। वैसे भी जयराम किसान के बेटे हैं और ग्रामीण परिवेश से आए हैं तो फिर चार कदम चलने के लिए 35 लाख का खर्च क्यों किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया में यह भी प्रतिक्रिया आ रही है कि जब प्रदेश लगातार कर्ज लेकर चल रहा है तो सरकार के स्तर पर इनती बढ़ी फिजूलखर्ची क्यों की जा रही है। सरकार पर वर्तमान में ही 55 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज है और सरकार ने अभी हाल ही में 450 करोड़ का कर्ज लिया और इसके साथ ही 1 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। सोशल मीडिया में एक और प्रतिक्रिया यह है कि ओकओवर हेरीटेज बिल्डिंग हैं। इस ऐतिहासिक बिल्डिंग में इस तरह तोड़फोड़ कर बदलाव नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह अपराधिक मामला बनता है। इस तरह सोशल मीडिया में सैकड़ों लोग ओक ओवर में लगने वाली 35 लाख की लिफ्ट के खिलाफ प्रतिक्रिया दे रहे हैं। प्रदेश के एक प्रसिद्ध साहित्यकार ने अपने प्रतिक्रिया ने लिखा है कि यह तो पूरी तरह से फिजूल खर्ची है और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की नीतियों के खिलाफ है। अगर ओक ओवर में ऐसा हो रहा है तो यह दुर्भाग्य पूर्ण हैं और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए।
जनता के प्रतिक्रिया कई दिनों से आ रहीं हैं लेकिन सरकार की तरफ से या जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मुख्यमंत्री निवास ओकओवर की देखभाल का जिम्मा समान्य प्रशासन विभाग के पास ही होना लेकिन वहां से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सरकार को चाहिए कि ओकओवर में लिफ्ट लगाने के मामले में अपना पक्ष जनता के सामने लाए। आखिर ऐसी क्या जरुरत युवा और जवां मुख्यमंत्री को पड़ गई कि दस सीढ़ियां चढ़ने के लिए 35 लाख सरकार खर्च से लिफ्ट लगानी पड़ रही है।