आईएएस असफर ने दिखाया दम, विधायक के भाई को नहीं दी मनचाही पोस्टिंग, विधायकों की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने छीने विभाग, अब कर रहे जनजातीय क्षेत्र का विकास

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शिमला. आईएएस अधिकारी हो तो ऐसा, जो पद की गरिमा भी बनाए रखें और पद की लालसा में किसी के सामने नतमस्तक न हो। आईएएस का पद बहुत ही बड़ा और गरिमापूर्ण होता है। जब भी किसी आईएएस – आईपीएस अधिकारी किसी नेता के सामने घुटने टेकता है तो उसकी चचाएं सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर में होती हैं। इसके विपरीत एक अधिकारी जब कानून के दायरे में काम करते हुए नेताओं के सामने नतमस्तक नहीं हुआ तो उसकी भी चर्चाएं हिमाचल प्रदेश में हो रही हैं। सरकार के सचिवालय से लेकर सियासत तक आईएएस अधिकारी की चर्चा है कि वह पद की लालसा में नेताओं के सामने नतमस्तक नहीं हुआ। आईएएस अधिकारी ने कांगड़ा जिले के एक विधायक के भाई को मनचाही पोस्टिंग नहीं दी। विधायकों की शिकायत पर सरकार ने अधिकारी के सभी विभाग छीन लिए लेकिन अधिकारी ने अपनी गरिमा को बनाए रखा। वह किसी के सामने नतमस्तक नहीं हुए और सरकार के द्वारा दिए गए कार्य को करने में जुट गए। सचिवालय में आईएएस, एचएएस अधिकारियों सहित नेताओं के बीच अधिकारी के द्वारा उठाए गए कदम के चर्चा हैं। जबकि कई अधिकारी पद के लिए लॉबिंग करते हैं, नेताओं के सामने नतमस्तक होते हैं कि उन्हें मलाईदार पद और विभाग मिल जाएं। लेकिन इस अधिकारी ने बिना किसी के परवाह किए गैर कानूनी काम करने से मना कर दिया। इस समाचार में विधायक और अधिकारी के नाम इस कारण नहीं लिखा जा रहा है कि इस घटनाक्रम के संबंध में कागजी सबूत अभी नहीं हैं, सब मौखिक चर्चाएं हैं। लेकिन अधिकांश लोग समझ जाएंगे कि समाचार में किसकी बात हो रही है क्योंकि इससे पहले भी मीडिया में उक्त अधिकारी से संबंधित समाचार प्रकाशित हो चुके हैं।

मीडिया से लेकर सियासत में यही चर्चा है कि आखिरकार काबिल अफसर के पास एक ही विभाग क्यों हैं जबकि यही अधिकारी एक माह पूर्व तक सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्य बेहतरीन तरीके से संभाल रहे थे। सचिवालय में होने वाली चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि आईएएस अधिकारी ने अपने पद की गरिमा को बनाए रखते हुए दम दिखाया है। अधिकारी ने कांगड़ा जिलो के एक भाजपा विधायक के दबाव में आकर उसके भाई को एक सरकारी विभाग में मनचाही पोस्टिंग नहीं दी। विधायक चाहते थे कि उसका भाई अनाधिकृत तौर पर मनचाही कुर्सी पर बैठे लेकिन वह कानूनन सही नहीं था तो अधिकारी ने विधायक के भाई को पोस्टिंग नहीं दी। भाई को मनचाही पोस्टिंग न मिलने से खफा विधायक ने मुख्यमंत्री दरबार में शिकायत कर दी। शिकायत के बाद भी अधिकारी किसी के सामने नतमस्तक नहीं हुए और विधायक के भाई को पोस्टिंग नहीं दी। अधिकारी से खफा विधायक महोदय ने अपने पक्ष में दर्जन भर विधायक कर लिए और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से शिकायत की। अपनी पार्टी के विधायकों के दवाब को देखकर मुख्यमंत्री ने अधिकारी से संबंधित विभाग छीन लिया। सरकारी आदेश पर अधिकारी ने नए विभाग में कार्य करना शुरु कर दिया और अब एक ही विभाग के साथ जनजातीय क्षेत्र का विकास करने में जुटे हैं। अधिकारियों के तबादले होते रहते हैं और विभाग बदलते रहते हैं, यह सब अधिकारियों के कामकाज का हिस्सा हो गया है। लेकिन इस अधिकारी के विभाग छिनने की चर्चा सचिवालय सहित सियासत में भी है। जनता के सामने यह सच्चाई नहीं आ पा रही थी कि आखिर क्या कारण है कि एक काबिल अधिकारी के विभाग बदल दिए गए। लेकिन धीरे धीरे यह बात सामने आ ही गई कि आखिर क्या कारण रहा कि अधिकारी के विभाग बदले गए।