सत्ता की कुर्सी पर विराजमान भाजपा नेत्री को चमचमाती गाड़ी नहीं मिली तो महिला अधिकारी को किया प्रताड़ित, पद से भी हटवाया

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शिमला. सत्ता का नशा भाजपा नेत्रियों के सर चढ़ कर बोल रहा है। अब मामला महिला सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी वाली कुर्सी में विराजमान महिला नेत्री को चमचमाती कार चाहिए थे। बताते हैं कि प्रदेश की सेहत भी यह नेत्री बखूबी संभाल रही है। जल्द चमचमाती कार नहीं मिली तो महिला नेत्री ने महिला प्रशासनिक अधिकारी को प्रताड़ित करना भी नहीं छोड़ा। खरी खोटी सुनाई भी और पद से भी हटा दिया। चमचमाती गाड़ी लेने के के लिए विभागीय कार्यवाही में देरी हुई तो महिला नेत्री ने अपनी अधिकारी पर ही धावा बोल दिया। महिला नेत्री और अधिकारी के बीच बहस भी हुई लेकिन सजा भुगतनी पड़ी अधिकारी को। क्योंकि महिला नेत्री के हाथों सत्ता की पावर है। महिला नेत्री ने अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए अधिकारी को ही पद से हटवा दिया। अब अधिकारी अपना दुखड़ा लेकर घूम रहे हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं महिला नेत्री का अब चमचमाती गाड़ी मिल गई हैं जिससे वह सत्ता के रुतबा दिखाते हुए सत्ता का सुख महंगी गाड़ी के साथ ले रहीं हैं।

इससे पहले ही सत्ता की कुर्सी पर सवार मंडी जिले की महिला नेत्री का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मंत्री नेत्री मंडी जिले में अफसरों के दलबल के साथ जनता के बीच रौब दिखा रहीं थीं। महिला नेत्री के रौब को लेकर चर्चाएं बहुत थीं और वीडियों के साथ खबरें भी समाचार चैनलों में चल रहीं थी। जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे थे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार में सत्ता की पावर के चलते अधिकारियों की ताजपोशी और हटाने का खेल चल रहा है। भाजपा विधायकों और नेताओं की सिफारिश पर ही अधिकारियों की ताजपोशी हो रही है और विरोध करने पर पद से हटा दिया जा रहा है। अधिकारियों की ताजपोशी और हटाने के पीछे भाजपा नेताओं और नेत्रियों का क्या मकसद है, यह जगजाहिर ही होता है। लेकिन सरकार के लिए काम करने वाले अधिकारियों के बीच भारी निराशा और विरोध हो रहा है। पूर्व में भी एक मामला आया कि जब सचिवालय में बैठने वाले आईएएस अधिकारी ने एक विधायक के भाई को मनचाही पोस्टिंग नहीं दी तो उसके विभाग छीन लिए गए। जिसे लेकर भी अधियारियों और सियासत में खासी चर्चा रही है। अधिकारियों की ताजपोशी और हटाने के खेल में भले ही भाजपा नेताओं और नेत्रियों को व्यक्तिगत फायदा हो रहा हो लेकिन जनता के बीच सरकार की छवि खराब हो रही है। इस बारे में सत्ता के मुखिया को मंथन करने की आवश्यकता है क्योंकि दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता ने ही सरकार को वोट देना है।