महंगे हेलीकॉप्टर को लेकर मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार को घेरा, 35 करोड़ सालाना में पड़ेगा हेलीकॉप्टर, नए कंपनी के करार को सार्वजनिक करें सरकार

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2019 में कंपनी के पास हेलीकॉप्टर ही नहीं था, तो कैसे किया करार, डेढ़ साल बाद मिला हेलीकॉप्टर, इसके पीछे क्या राज हैं

अभी प्रदेश को कोरोना की दवाई और ऑक्सीजन की जरुरत, मुख्यमंत्री ले रहे नया हेलीकॉप्टर

कोरोना के लिए जनता से मांग रहे दान, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का वेतन भी काट लिया

शिमला. विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को हवा में उड़ने के लिए लिया गया नया, महंगा और बड़ा हेलीकॉप्टर लेने पर सवाल खड़े किए हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि कोरोना संकट से निबटने के लिए सरकार जनता से दान मांग रही है, कर्मचारियों के वेतन काट रही है तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हवा में उड़ने के लिए महंगा हेलीकॉप्टर विदेश से मंगवा रहे हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि यह नया और बड़़ा हेलीकॉप्टर सरकार को प्रतिवर्ष करीब 35 करोड़ रुपए से अधिक में पड़ेगा। अग्निहोत्री ने कहा कि जब सरकार ने 2019 में कंपनी के साथ करार किया उस समय कंपनी के पास हेलीकॉप्टर ही नहीं था। बिना हेलीकॉप्टर वाली कंपनी से करार करने के पीछे क्या राज है, इसको बताए सरकार। इस कारण ही कंपनी ने सरकार को डेढ़ साल बाद हेलीकॉप्टर दिया है। बिना हेलीकॉप्टर वाली कंपनी के साथ करार के पीछे क्या मंशा रही है, यह भी सार्वजनिक होनी चाहिए। अग्निहोत्री ने इस करार में भ्रष्टाचार होने की आशंका जताई है।
प्रतिपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने संसदीय कार्यमंत्री पर पलट वार करते हुए कहा कि हिमाचल सरकार को हेलिकॉप्टर सौदा सालाना 35 करोड़ में पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार नई कम्पनी से हुए करार के दस्तावेज सहित पुराने करारों सहित सार्वजनिक करे, जिससे जनता के सामने सच्चाई सामने आएगी। साथ में कम्पनी को लगाए गए 5 करोड़ जुर्माने के काग़ज़ात भी दिखाए, क्योंकि जुर्माना लगाने की दावा उन्होंने किया है। उन्होंने कहा नए हेलीकाप्टर ख़रीद की टाइमिंग पर हिमाचल में ही नहीं पूरे देश में प्रतिक्रिया हुई है कि ऐसा कौन सा प्रदेश है, जो कोविड काल में हेलीकाप्टर ख़रीद रहा है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है। आज जब भारद्वाज हेलीकाप्टर ख़रीद पर सफ़ाई दे रहे हैं, उस दिन भारत ने कोरोना में विश्व रिकोर्ड बनाया है। सरकार सभी कर्मचारियों की दो – दो रोज़ की तनख़्वाह काट रही है, चतुर्थ श्रेणी को भी नहीं छोड़ा। सरकार जनता के सामने हाथ फैलाए हुए है। अगर कोरोना काल में छोटा हेलिकॉप्टर ही चलाए रखते तो क्या दिक़्क़त थी। उन्होंने पूर्व मुख्य मंत्री के समय खच्चर, गधे पर चलने जैसी शब्दाबली पर एतराज जताया और कहा कि इस शासन में में भी हेलीकाप्टर का इस्तेमाल कहां- कहां हुआ है, सब मालूम है, यह मत समझो कि इसबारे किसी को कोई खबर नही। प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि क़र्ज़े के रिकॉर्ड टूट गए, क़र्ज़े लेने की सीमाएं बढ़ाई जा रही है, एक इंच भी सरकार बिना हेलीकाप्टर के नहीं चलती, अन्दाज़ शाही हैं कि रशिया से मंगाए चमचमाते हेलीकाप्टर की ही सवारी करनी है। इस समय वैक्सीन एवं ऑक्सीजन ज़रूरी है ना की हवाई सर्वे। उन्होंने कहा कि ट्राइबल इलाक़ों का तो महज़ नाम है। उन्हें कितनी बार हेलीकाप्टर भेजा गया। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पवन हंस सरकारी कम्पनी थी। 2012 में तत्कालीन धूमल सरकार ने तीन लाख 36 हज़ार प्रति घंटे के हिसाब से हेलीकाप्टर लिया , जबकि 2017 में कांग्रेस सरकार के समय उसे दो साल के लिए तीन लाख तीस हज़ार पर करार हुआ था। जबकि अब पांच लाख दस हज़ार पर करार किया है। जिससे तय है कि यह नया हेलीकॉप्टर की सवारी बहुत महंगी पड़ेगी।