कांग्रेस की सियासत : सीएलपी सुरक्षित, संगठन पर उठे सवाल, प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी को खतरा, नेताओं ने ठोंकी अध्यक्ष पद की दाबेदारी

448

संदीप उपाध्याय

शिमला. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला के दौरे के साथ कांग्रेस में हलचल पैदा हो गई है। राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी शुक्ला ने संगठन के पदाधिकारियों और विधायकों से मिलकर पार्टी के हालात को बारीकी से जाना। वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से उनकी आवास पर जाकर मुलाकात की तो पूर्व मंत्री विद्या स्टोक्स से भी मिले। प्रदेश प्रभारी के समक्ष कांग्रेसी नेताओं ने खुलकर कुछ बातें रखीं तो बहुत से बातें परदे के पीछे कहीं गईं। राजीव शुक्ला के दौरे के दौरान जो बात खुलकर सामने आई वह यह थी कि संगठन की कार्यप्रणाली पर लगातार नेताओं ने अपने संबोधन में सवाल उठाए। मुद्दा यह रहा कि विधानसभा के मंच पर सरकार को घेरने में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री अपने विधायकों के साथ सफल तो होते हैं लेकिन संगठन इन मुद्दों को जनता के बीच नहीं उठा पा रहा है। मतलब सरकार के खिलाफ ज्वलंत मुद्दों की गूंज विधानसभा के सदन तक सीमित हो जाती है और प्रदेश की जनता के बीच नहीं पहुंच पाती। विधायकों का कहना था कि जनता के बीच मुद्दों की आग लगाने की काम संगठन का भी है। विधायक अपने दम पर पूरा प्रयास कर रहे हैं। जिससे राजीव शुक्ला के समक्ष संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। जिससे अब कांग्रेसी के सीनियर नेताओं का कहना है कि सीएलपी की कुर्सी तो सुरक्षित है लेकिन अध्यक्ष पद की कुर्सी को खतरा है। अब संगठन को नई ऊर्जा के साथ काम करने की जरुरत है, जिससे तय माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद को बदलने की कवायद अब शुरु हो जाएगी।

विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में भी कहा कि विधायकों को विधानसभा में 35 दिन का समय मिलता है। जिससे सरकार के खिलाफ हर मुद्दे को उठाकर घेरा जाता है। सदन में उठे मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर आग लगाने का कार्य संगठन को करना चाहिए। लगभग यही बात कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी राजीव शुक्ला के समक्ष रखी। मुकेश की इस बात पर प्रदेशाध्यक्ष थोड़ा असहज रहे लेकिन कहा कि वह मुद्दा उठाने का पूरा प्रयास करेंगे।

प्रदेश की प्रभारी राजीव शुक्ला के समक्ष सीनियर कांग्रेसी नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष पद पर अपनी दाबेदारी भी जताई है। किसी ने सीधे तौर पर दाबेदारी जताई है तो किसी ने परदे के पीछे अपने समर्थकों के माध्यम से दाबेदारी जताई है। अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, आशा कुमारी, सुखविंदर सिंह सुक्खू, रामलाल ठाकुर प्रमुख हैं। वहीं कांग्रेस के विधायकों के एक बड़ समूह में सीएलपी मुकेश अग्निहोत्री को प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान सौंपने की बात की है।

पूर्व मंत्री नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर ने तो प्रदेश प्रभारी के शिमला आगमन पर उनके स्वागत में लगाए गए पोस्टरों के माध्यम से अपना दबदबा दिखाया है। शिमला में शोघी से लेकर राजीव भवन तक राजीव शुक्ला के स्वागत के बैनर रामलाल ठाकुर की ओर से लगे दिखे। जिससे सबको दिखा कि रामलाल ठाकुर प्रचार के माध्यम से बहुत कुछ कहना चाहते हैं। वहीं सिरमौर जिले से पांच बार के विधायक हर्ष वर्धन चौहान ने भी अपने भाषण में बहुत कुछ कहा। हर्षवर्धन ने कहा कि वह पांच बार विधायक रहे चुके और अभी तक मंत्री भी नहीं बन पाए। हर्षवर्धन के भाषण के शब्दों से सब समझ गए कि आखिर वह प्रभारी के समक्ष कहना क्या चाह रहे हैं। इसे अध्यक्ष पद की दाबेदारी के रुप में भी देखा जा रहा है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर तो पहले ही अध्यक्ष पद की दाबेदारी कर चुके हैं और मंडी में उनके समर्थकों ने अध्यक्ष बनाने की मांग भी की है। यह बात प्रदेश प्रभारी तक भी पहुंच चुकी है। अध्यक्ष पद के दाबेदारों में पूर्व मंत्री आशा कुमारी के नाम की भी चर्चा है लेकिन उनके साथ कुछ विवाद जुड़ हैं। आशा कुमारी की खिलाफत करने वाले नेता उनके पुराने भ्रष्टाचार के मामले को उठा देते हैं जिससे उनकी दाबेदारी कमजोर हो जाती है। आशा कुमारी को हाल ही में पंजाब प्रदेश प्रभारी पद से हटाया गया है, यह भी अच्छा संकेत नहीं है। वहीं राजीव शुक्ला के समक्ष कांग्रेस विधायकों के एक बड़े वर्ग ने सीएलपी मुकेश अग्निहोत्री को अध्यक्ष पद सौंपने की बात रखी है। विधायकों का मानना है कि अग्निहोत्री ने गत तीन सालों के दौरान विपक्ष के नेता की भूमिका बेहतर ढंग से निभाकर सरकार को हर मोर्चे पर घेरने में कामयाबी हासिल की है। जिससे अब आगामी विधानसभा चुनावों को देखकर मुकेश अग्निहोत्री को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी जाए, जिससे संगठन को मजबूत कर प्रदेश स्तर पर सरकार को घेरने में कामयाबी हासिल की जाए। संगठन के पदाधिकारियों और पार्टी के विधायकों से मंत्रणा करने के बाद राजीव शुक्ला ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी संगठन के बारे में मंत्रणा की है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी वीरभद्र सिंह ने वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर को ही बनाए रखने की बात की है। दिल्ली रवाना होने से पूर्व राजीव शुक्ला ने कांग्रेस पदाधिकारियों को लंबा चौड़ा होम वर्क दिया है। पार्टी नेताओं से कहा कि वह एक मास्टर प्लॉन तैयार करें जिससे प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदेश व्यापी आंदोलन छेड़ा जा सके। अब देखना है कि राजीव शुक्ला दिल्ली में हाईकमान से मंत्रणा करने के बाद प्रदेशाध्यक्ष के बारे में क्या निर्णय लेते हैं। यह तय है कि अध्यक्ष पद के दाबेदार अब दिल्ली में हाईकमान के समक्ष अपने दाबेदारी को लेकर लॉबिंग शुरु करेंगे। अब देखना है कि प्रदेश से मिले फीडबैक के आधार पर हाईकमान क्या निर्णय लेता है।