कांग्रेस के लिए हॉट सीट बनी शिमला, यशवंत छाजटा, नरेश चौहान और हरीश जनारथा के बीच छिड़ी टिकट की जंग

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शिमला. प्रदेश की राजधानी शिमला कांग्रेस के लिए हॉट सीट बनी हुई है। पिछले 15 सालों से भाजपा के कब्जे वाली सीट कांग्रेस में खाते में डालने के लिए कांग्रेसी दिग्गजों में मंथन चल रहा है। कांग्रेस नेता गंभीरता के साथ जिताऊ प्रत्याशी का चयन करना चाह रहे हैं। जिससे राजधानी शिमला सीट में कांग्रेसी नेता एकजुटता के साथ लड़े और भाजपा से सीट छीनने में कामयाब हों। शिमला सीट के लिए कांग्रेस के कई नेताओं ने दावेदारी जताई थी लेकिन अब स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग में अंतिम तीन नामों पर मंथन चल रहा है। जिसमें यशवंत छाजटा, नरेश चौहान और हरीश जनारथा शामिल हैं। कांग्रेसी नेता दो मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। जिसमें पहला ऐसा नाम हो, जिसमें सभी दावेदारों की सहमति बन सके और दूसरा जीतने के लिए नए चेहरे को मैदान में उतारा जाए।

शिमला शहर से टिकट के लिए तीन नेताओं के बीच छिड़ी जंग के बीच हाईकमान के समक्ष सीनियर नेता पैरवी कर रहे हैं। एक गुट किसी को जिताऊ बता रहा है तो दूसरा गुट उसकी कमजोरियों को सामने रखकर दूसरे की पैरवी कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह शिमला सीट के लिए यशवंत छाजटा का नाम आगे किया है। यशवंत छाजटा नए चेहरे के रुप में सामने आए हैं। लेकिन छाजटा का कांग्रेस के संगठन का बायोडाटा कमजोर हैं। छाजटा संगठन में पूर्व कांग्रेस सरकार के समय ही आए हैं, जिससे वह कांग्रेस के सीनियर नेताओं के सामने टिक नहीं पा रहे हैं। शिमला में ठेकेदारी करने वाले छाजटा को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय संगठन में शामिल किया गया था।  

शिमला से टिकट के दूसरे दावेदार हरीश जनारथा है। हरीश जनारथा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के समर्थक हैं। वीरभद्र सिंह के आशीर्वाद से 2012 के विधानसभा चुनावों में हरीश जनारथा को कांग्रेस का टिकट मिला था। जनारथा को जिताने के लिए वीरभद्र सिंह ने शहर में प्रचार भी किया लेकिन जनारथा जीत दर्ज नहीं कर सके। प्रदेश में कांग्रेस ने जीत दर्ज की लेकिन राजधानी शिमला की सीट भाजपा के खाते में ही रही। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने हरभजन सिंह भज्जी को उम्मीदवार बनाया तो जनारथा  बगावत करके निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में उतरे। चुनाव में न कांग्रेस प्रत्याशी जीता और न ही जनारथा जीते, भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। शिमला शहर से दो बार चुनाव हारने के बाद जनारथा फिर से दावेदारी कर रहे हैं।

कांग्रेस के नए चेहरे के रुप में मजबूत प्रत्याशी के रुप में नरेश चौहान भी टिकट की जंग में शामिल हैं। टिकट के लिए नरेश चौहान की पैरवी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और प्रचार कमेटी के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू कर रहे हैं। सुक्खू का शिमला शहर में खुद का भारी जनाधार है। शिमला शहर में ही उनकी राजनीति की शुरुआत हुई है। वह शिमला से पार्षद भी रहे हैं और एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस की सियासत भी शिमला में रहकर करते रहे हैं। जिससे सुक्खू शिमला शहर में गहरी राजनैतिक पकड़ रखते हैं। सुक्खू की सियासत के एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और अब कांग्रेस के साथी नरेश चौहान जिताऊ उम्मीदवार के रुप में देखे जा रहे हैं। कांग्रेस के राजनीति में तीन दशक से सक्रिय नरेश चौहान साफ छवि के नेता हैं। नरेश चौहान प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ता से लेकर मीडिया प्रमुख की भूमिका निभाते हुए एक पहचाना हुआ चेहरा भी हैं। जिससे सुक्खू के साथ के कारण नरेश चौहान शिमला सीट को कांग्रेस की झोली में डालने में कामयाब हो सकते हैं।

टिकट आबंटन के लिए हॉट सीट बनी शिमला के लिए हाईकमान दिग्गज नेताओं के साथ मंथन कर रहा है। टिकट के प्रमुख दावेदारों की पैरवी हो रही है। कांग्रेस हाईकमान प्रमुख दावेदारों के मजबूत पक्ष और कमजोर पक्ष का अध्ययन कर रहा है। उम्मीद है कि कांग्रेस शिमला शहर की सीट को जीतने के लिए उम्मीदवार का चयन सही ढंग से करेगी। जिससे राजधानी की सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो सके।