काँग्रेस सरकार में नियुक्ति के 8 आठ साल बाद ख़ाली हो रहा एचपीपीएससी में अध्यक्ष का पद

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वीरभद्र ने मौजूदा मेजर राणा के पहले मीडिया से जुड़े के॰एस॰ तोमर को लगाया था अध्यक्ष
– जुलाई 2013 से मई 2017 तक तोमर और 16 मई 2017 से 23मार्च 2021 तक राणा रहे चेयरमैन
– तोमर के सगे भाई एस॰एस॰ तोमर को भी पाँच सालों तक वीरभद्र सरकार ने बनाया था कमिशन मेम्बर

– मीरा वालिया को भी सेवा कमिशन में भेजने से पहले लगाया था प्राईवेट वी॰वी॰रेग्युलेटरी कमिशन का मेम्बर .

हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह राणा अगले सप्ताह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके साथ ही काँग्रेस कार्यकाल में हुई लम्बी नियुक्तियों का कार्यकाल खतम होगा । पूर्व में वीरभद्र सिंह सरकार में राणा को यह नियुक्ति 16 मई 2017 में मिली थी। जबकि उससे पहले वीरभद्र सरकार ने के . एस तोमर जो कि मीडिया में रहे , को क़रीब चार साल तक अध्यक्ष बनाया था । राणा अभी काँगड़ा ज़िला से हैं और तोमर सिरमौर से थे । तोमर के भाई एस॰एस॰ तोमर को भी कांग्रस में वीरभद्र ने पाँच साल से ज़्यादा तक आयोग में मेम्बर बना के रखा था ।
अब धर्मवीर राणा का करीब चार वर्ष का कार्यकाल बतौर अध्यक्ष रहा है। उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही राज्य सरकार को अपने पसंद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का मौका मिलेगा।
वीरभद्र सिंह सरकार के समय पर चुनावों के ऐन पहले मीरा वालिया को 16 मई 2017 में लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। उससे पहले मीरा को वीरभद्र सरकार ने निजी वी॰वी॰ रेगुलेट्री आयोग का सदस्य बनाया था । फिर एच॰पी॰पी॰एस॰सी॰ से उनकी सेवानिवृत्ति भी करीब साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में बाद वर्ष 2020 के अंत में ही हुई है। अब वर्तमान में डॉ. रचना गुप्ता ही आयोग में सबसे सीनियर सदस्य हैं। इनकी नियुक्ति वर्तमान भाजपा सरकार ने वर्ष 2018 में की और करीब तीन वर्ष से यह कमीशन के सदस्य के रुप में कार्य कर रहीं हैं। वो भी क़रीब 23 साल तक मीडिया में रहीं । वो निष्पक्ष पत्रकारीता के लिए जानी जाती थी ।
इंडियन इक्स्प्रेस समूहमें पत्रकारीता के बाद वो दैनिक जागरण में राज्य सम्पादक रही । उन्होंने जर्नलिज़म में पोस्ट ग्रैजूएशन के साथ ही पी॰एच॰डी॰ भी की है ।
लंबे अरसे तक पूर्व कांग्रेस सरकार में हुईं नियुक्तियों के अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपनी नई टीम आयोग में तैनात कर सकते हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार आयोग में 50 फीसदी सदस्य सरकारी पृष्ठभूमि में कार्य किए गए अधिकारी ही लग सकते हैं।
हिमाचल लोक सेवा आयोग में उच्च शैक्षणिक योग्यता के साथ ही कभी भी महिला को चेयरमैन नहीं बनाया गया है। यदि मीडिया की वरिष्ठ पृष्ठभूमि और कमीशन में अनुभव को भाजपा सरकार तरजीह देती है तो यह पहली बार होगा कि चेयरमैन पद पर कोई महिला आसीन होगी। सरकार किसी तजुर्बे को अहमियत नहीं देती तो किसी और को भी आयोग में ले सकती हैं ।
इससे पूर्व वीरभद्र सिंह की सरकार ने मीडिया से ताल्लुक रखने वाले के. एस. तोमर को चेयरमैन बनाया था। जिनका कार्यकाल जुलाई 2013 से मई 2017 तक करीब चार वर्ष रहा।
इससे पहले तोमर के ही सगे भाई एस.एस. तोमर को भी कांग्रेस सरकार ने सदस्य बनाया था, जिनका कार्यकाल वर्ष 1996 से लेकर 2001 तक करीब पांच वर्ष रहा।
जब वर्तमान सरकार ने डॉ. रचना गुप्ता को आयोग में उच्च शैक्षणिक योग्यता और मीडिया के लंबे अनुभव के कारण सदस्य बनाया था तब कमीशन में कांग्रेस कार्यकाल में नियुक्त लंबी टीम मौजूद थी। जिसे संवैधानिक प्रावधान के चलते भाजपा सरकार बदल नहीं सकी।
अब अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग में वरिष्ठ और अनुभव वाले सदस्य को ही अध्यक्ष बनाया जाता है। हिमाचल में भी पहले करीब पांच सदस्य अनंग, के॰एल॰ रतन, देवराज,एस॰ निगम को आयोग में चेयरमैन बनाया गया है ।देखना यह है की भाजपा सरकार ,पूर्व कांग्रेस सरकार में नियुक्त अफ़सरों के जाने के बाद किसे अधिमान देती है ।