प्रधानमंत्री बढ़ा गए पठानिया का सियासी कद, दो मिनिट रुककर की बात, बोले, बड़ा शरारती था, मेरे हाथ नहीं आता था, अब कैसा है

664

शिमला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अटल टनल रोहतांग का उद्धाटन समारोह प्रदेश के लिए कई मायनो में यादगार और ऐतिहासिक रहा है। इसी मायने में प्रधानमंत्री की प्रदेश के वन मंत्री राकेश पठानिया से दो मिनिट की बातचीत भी यादगार हुई। टनल के उद्घाटन समारोह के समय मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए खड़े थे। प्रधानमंत्री सभी से नमस्ते स्वीकार कर आगे बढ़ रहे थे कि सामने वन मंत्री राकेश पठानिया ने भी नमस्कार किया। तो प्रधानमंत्री खड़े होकर पठानिया से बातचीत करने लगे। यह पठानिया के लिए एक सुखद समय था। सभी मंत्रियों में से सिर्फ पठानिया से बातचीत करने से पठानिया का सियासी कद बढ़ गया। यह तो साबित ही हो गया कि पठानिया को प्रधानमंत्री व्यक्तिगत तौर पर अच्छे से पहचानते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पठानिया के साथ अपनी बातचीत में पुराने समय की यादें ताजा की। प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा देते हुए पठानिया बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने देखते ही कहा कि पहले तो बहुत दुबला पतला होता था अब मोटा हो गया है। इसके साथ ही 1996 के चुनाव की बात करते हुए कहा कि पहले तो बहुत शरारती था, मेरे हाथ नहीं आता था, अभी भी वैसा ही है कि सुधर गया है। प्रधानमंत्री ने पठानिया को हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर वनों को बेहतर ढंग से संवारने की भी बात की।

प्रधानमंत्री के साथ पठानिया के साथ पुरानी यादों की बात उस समय की हैं, जब नरेंद्र मोदी हिमाचल के प्रभारी होते थे। वर्ष 1996 के चुनाव हों या 1998 के चुनाव हों। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार का समय हो। पठानिया उस दौर में राजनीति में नए थे, युवा थे और दबंग भी थे। राजनीति के उस दौर में पठानिया तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी भी रहे हैं। उस दौर में प्रदेश की राजनीति में कांगड़ा राजनीति का अखाड़ा भी रहा है। राजनीति के इस अखाड़े में पठानिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। जिसके कारण ही हिमाचल के प्रभारी रहे नरेंद्र मोदी के साथ विधायक राकेश पठानिया के करीबी संबंध रहे हैं।

प्रधानमंत्री के साथ मंत्री बनने के बाद पठानिया की पहली मुलाकात काफी सुखद रही है। पठानिया जहां व्यक्तिगत रुप से बहुत खुश हैं तो राजनैतिक रुप से भी यह बातचीत बहुत मायने रखती है। पठानिया के साथ प्रधानमंत्री की यह मुलाकात सत्ता के गलियारों में चर्चित है। जिसका फायदा पठानिया को आगे की सियासत में भी मिलेगा, यह तय है।