जल मंत्री की शक्ति : पानी से पहले बहा पैसा, 25 लाख की इनोवा, 1 लाख का नंबर, आरोपों से घिरे मंत्री महेंद्र सिंह

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संदीप उपाध्याय

शिमला. कोरोना काल चल रहा है, आम जनता के साथ सरकार भी आर्थिक संकट में आ गई है। वैसे भी हिमाचल सरकार कर्ज लेकर ही चल रही है। सरकार पर वर्तमान में 55 हजार करोड़ से अधिक कर्ज है और 15 हजार से अधिक कर्ज पर व्याज का भुगतान करना है। ऐसे कर्ज और आर्थिक संकट के समय अफसरों के लिए महंगी गाड़ियां खरीदना सवाल खड़े करता है। मंडी जिले में जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के विभाग के जलजीवन मिशन के तहत गाड़ियों की खरीददारी विवाद में है। मीडिया की सूचना के अनुसार मंडी जिले के अधिकारी के लिए 25 लाख की इनोवा खरीदी गई और इसमें वीआईपी नंबर 1 लाख में लिया गया है। इसी तरह मंडी में ही बलेरो और हमीरपुर में महंगी गाड़ी खरीदने की खबरें मीडिया में चल रही हैं। सवाल तो तब उठा जब साहब की गाड़ी के लिए 1 लाख का नंबर भी लिया गया। आरोप यह भी है कि यह गाड़ी मंत्री जी के बेटे उपयोग कर रहे हैं हालांकि मंत्री के बेटे ने कहा कि यह गाड़ी मंत्री जी के ओएसडी के लिए हैं। मैं भी उनके साथ बैठ लेता हूं। सवाल यह भी है कि मंत्री जी के ओएसडी के लिए 25 लाख की गाड़ी 1 लाख के वीआईपी नंबर के साथ उपलब्ध कराई जा रही है। सवाल यह है कि जलजीवन मिशन लोगों को पानी की सुविधा  घर पर उपलब्ध कराने के लिए हैं। लेकिन अब पानी तो आया नहीं लेकिन जलजीवन मिशन का पैसा पानी की तरह बहता दिख रहा है। सवाल यह भी है कि क्या जलजीवन मिशन से पूर्व सरकार के अधिकारियों के पास गाड़ी नहीं थी। इससे पहले वह किस गाड़ी में सरकारी काम कर रहे थे। सवाल यह भी है कि 25 लाख से अधिक गाड़ी तो सरकार के मंत्रियों को मिलीं हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय जब सरकार ने मंत्रियों के लिए गाड़ियां खरीदी थीं जिनकी कीमत 20 लाख के करीब थी, उसका भाजपा नेताओं ने विरोध किया था तो अब भाजपा संगठन के लोग भी चुप क्यों बैठे हैं। जलजीवन मिशन का पैसा खर्च ही करना है तो लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए खर्च करते या रोजगार प्रदान करने के लिए उपयोग करते। मिशन के तहत स्थानीय लोगों को रोजगार के विकल्प भी देखे जा सकते थे। लेकिन मंत्री जी ने लाखों रुपए की गई गाड़ियां खरीद ली हैं। मिशन के पैसों से महंगी गाड़ी खरीदने के आरोपों से मंत्री जी घिर गए हैं। अब न तो मंत्री जी, न ही सरकार के प्रवक्ता और न ही भाजपा के नेता कुछ बोल रहे हैं। सब ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। शायद इसलिए कि मंत्री महोदय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी माने जाते हैं। सत्ता पक्ष कुछ बोले न बोले, लेकिन जनता के बीच मंत्री जी की फिजूलखर्ची चर्चा का विषय है। सोशल मीडिया में चारों तरफ इसका विरोध हो रहा है। जिससे यह साफ दिखता है कि ऐसे महंगी गाड़ियों की खरीददारी से सरकार की छवि अवश्य खराब हो रही है। मुख्यमंत्री का चाहिए कि प्रदेश के विकास के लिए किसी भी मिशन के लिए आने पर फंड का सदुपयोग हो, इस पर पूरी निगरानी होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जरुरत नहीं है फिर भी मंत्री जी के ओएसडी के लिए महंगी गाड़ी खरीदी जाए। हालांकि यह गाड़ी जल शक्ति विभाग के एक अधिकारी के नाम खरीद है, भले ही उस अधिकारी ने अभी तक उस गाड़ी में सफर न किया हो। इस मामले में मंत्री जी को भी जवाब देना चाहिए कि आखिर क्या आवश्यकता थी 25 लाख की गाड़ी खरीदने की और उसमें 1 लाख का वीआईपी नंबर लेने की।