सरकार व संवैधानिक कार्यों में दखल के पीछे कौन लोग ?

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अदालत ने कहा था – पिटीशनर साफ-हाथ, साफ -आत्मा एवं साफ दिमाग से अदालत में केस नहीं करते ।”

कांग्रेस व भाजपा सरकारों में बाहरी कॉकस मिल कर, करते रहे षड़यंत्र

शिमला. हिमाचल में सरकार व संवैधानिक दफ्तरों में बाहरी लोगों की बढ़ती दिलचस्पी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं । ना सिर्फ भाजपा सरकार बल्कि पूर्व में भी कुछ बाहरी राज्यों से ताल्लुक रखने वाले लोगों की गड़ी नज़रों और प्रतिदिन के कामकाज पर अनावश्यक हस्तक्षेप को लेकर अदालत तक ने टिप्पणी की हैं। दरअसल हिमाचल में चंद लोगों का एक कॉकस काम कर रहा है, जो आरटीआई के नाम पर संस्थाओं की ओर बार-बार बेतुके निशाने छोड़ रहें हैं। इनमें कुछ ऐसे कथित पत्रकार भी शामिल हैं, जिन पर भवनों को लेकर 420 के मुकदमें दर्ज हैं और लड़कियों से छेड़छाड़ की शिकायतें भी पुलिस में पहुंची थी। हिमाचलियों में यह सुगबुगाहट है कि ऐसा क्या कारण है कि यह लोग सरकार की कार्यप्रणाली से लेकर सीआईसी, पीडब्ल्यूडी और लोक सेवा आयोग में दिलचस्पी दिखा रहे हैं ?

सूत्र बताते हैं कि सरकारों की बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनज़र ऐसे लोग किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। ज्ञात रहे कि हाल ही में हाईकोर्ट में जिस सीडब्ल्यूपी नंबर 1871/2017 की जजमेंट का निपटारण 01.01.2020 को हुआ जिसमें मुख्य न्यायाधीश नारायण स्वामी और ज्योत्सना रावल दुआ की संयुक्त बेंच ने हेमराज वर्सेस स्टेट ऑफ एचपी केस में फैसला सुनाया था कि कांग्रेस के समय में मीरा वालिया की नियुक्ति सही तरीके से की गई थी। परन्तु यह महसूस होता है कि पिटीशनर को किसी ने इस कार्य के लिए प्रयोग किया है और किसी ने “प्रयोग” करते हुए केस किया है। पिटीशनर ने रिस्पांडेट तीन के जूडिशियल पेपर कहां से लिए, यह भी संदेहास्पद है ? और पिटीशनर “साफ हाथ, साफ आत्मा और साफ दिमाग” से कोर्ट में नहीं आया है । हम पेटीशनर पर कॉस्ट लगाने को इन्क्लाईन हैं।…

जाहिर है कि कोर्ट ने ऐसे लोगों पर ईशारे किए हैं जो ”किन्हीं“ कारणों से संवैधानिक क्षेत्रों में दखल दे रहे हैं । सूत्र बताते हैं कि सूचना एकत्र करने के कार्य के पीछे एक बड़ा कॉकस काम करता है जिनके लिंक काल मार्कस की विचारधारा से मेल खाते हैं। यह फेक पत्रकार हैं जिनकी कार्यप्रणाली संदेह में है । इनके पते नोयडा व दिल्ली के बताए जाते हैं । कांग्रेस सरकार के समय पर भी यही जुंडली आपरेट कर रही थी और अब भाजपा के समय में भी । बताते हैं कि सोशल मीडिया में इस तरह की हरकतें करके ब्लैकमेल करने और साजिशें रचने का खेल, करने के पीछे इनके अपने मंसूबे भी हैं। दरअसल ना तो वीरभद्र ने ना ही जयराम ठाकुर ने ऐसे लोगों को मुंह लगाया, ना ही उनकी मांगे मानी। जबकि इनमें से अपने परिवार जनों को ऐडिशनल ऐडवोकेट बनाने तक का दवाब इस जुंडली ने कांग्रेस व भाजपा सरकार में बनाया था। पर ऐसा हो नहीं पाया, साथ ही रहने व घूमने आदी में मुफ्त का इंतजाम भी बंद कर दिया । इसीलिए दवाब बनाने के लिए कुछ लोगों का समूह अपनी भड़ास निकाल रहा है ।