सुक्खू ने दिखाई राजनैतिक कुशलता, बिना माफी कराया विधायकों का निलंबन रद्द, बने कांग्रेस की जीत के हीरो

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शिमला . विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन हुए हंगामे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध को शांत करने में कांग्रेस के सीनियर विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अहम भूमिका निभाई। सुक्खू अपने राजनैतिक कौशल का परिचय देते हुए कांग्रेस की शर्तों के अनुसार ही सत्ता से समझौता करने में कामयाब रहे। सत्ता पक्ष जहां राज्यपाल से माफी मांगने की शर्त पर अड़ा रहा लेकिन सुक्खू ने पहल कर ऐसा समझौता किया कि कांग्रेसी नेताओं को माफी भी नहीं मांगनी पड़ी और सत्ता पक्ष को झुककर बिना शर्त निलंबन रद्द करना पड़ा। बिना शर्त पांच विधायकों का निलंबन रद्द होने पर कांग्रेस अपनी जीत का जश्न मना रही है, जिसके हीरो बने सुखविंदर सिंह सुक्खू। सत्ता और विपक्ष के बीच उठे विवाद को सुलझाने के लिए सुक्खू ही सबसे सुलझे हुए नेता के रुप में आगे आए, जिस पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी विश्वास जताया और समझौते का रास्ता निकालने के लिए सुक्खू से चर्चा शुरु की। सुक्खू लगातार विधानसभा अध्यक्ष विपन परमार, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और सरकार के मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के संपर्क में रहे और अंतत: कांग्रेस पार्टी के पक्ष में समझौता कराने में सफल रहे। जिससे सत्ता के गलियारों में सुक्खू के राजनैतिक कौशल की चर्चा तेजी से हो रही है। बिना शर्त विधायकों का निलंबन रद्द होने से कांग्रेस पार्टी को भी राहत मिली है।
विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध करते हुए कांग्रेस विधायकों ने राज्यापाल की गाड़ी को घेर लिया। जिससे कांग्रेस के विधायकों और विधानसभा उपाध्यक्ष के बीच धक्का मुक्की हो गई। सरकार ने राज्यपाल के घेराव को गंभीरता से लिया और कांग्रेस विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। स्थगित की गई विधानसभा को फिर से बुलाया गया और सरकार के प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री सहित पांच विधायकों को विधानसभा के पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया और पांचों विधायकों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करा दिए। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ कांग्रेस के निलंबित विधायक धरने पर बैठ गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर लगातार कहते रहे कि कांग्रेस विधायक जब तक राज्यपाल से माफी नहीं मांगेगे तब तक निलंबन रद्द नहीं होगा। दूसरी ओर कांग्रेस के विधायक किसी भी कीमत पर माफी मांगने को तैयार नहीं थे। सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही टकरार से ऐसा लग रहा था कि विधानसभा के पूरे सत्र के दौरान टकराव खत्म नहीं होगा। लेकिन बहुत जल्द ही कांग्रेस के विधायक सुक्खू ने पहल कि और ऐसा समझौता कराया जो कांग्रेस की शर्तों के अनुसार रहा और सत्ता को बैकफुट पर ला कर खड़ा कर दिया।
इस समझौते को अमलीजामा पहनाकर सुक्खू ने एक बार फिर अपनी राजनैतिक कुशलता साबित की है। यह राजनैतिक कुशलता सुक्खू ने अपने लंबे संगठनात्मक अनुभव के कारण ही हासिल की है। सुक्खू ने गत 30 वर्ष के अपने राजनैतिक सफर में लंबे समय तक संगठन में अहम भूमिका निभाई है। यह एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद के बाद कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी रहे हैं। जिससे उनको लंबा अनुभव है कि कैसे गंभीर परिस्थितियों में स्थिति को संभाला जाता है और विजय प्राप्त की जाती है। इससे पहले भी शिमला जिला परिषद के चुनाव में कांग्रेस के विजय के लिए सुक्खू ने पहल की और सभी सदस्यों को एकजुट कर कांग्रेस का जिला परिषद अध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे। इस तरह सुक्खू ने प्रदेश के नेताओं सहित हाईकमान को भी यह संदेश दे दिया है कि उनका राजनैतिक कौशल ही कांग्रेस को विजय दिलाने में कामयाबी हासिल करता है। इस पूरे घटनाक्रम में सुक्खू की भूमिका सबसे अधिक चर्चित रही है जिससे सुक्खू कांग्रेस की जीत के हीरो के रुप में देखे जा रहे हैं।